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(आभार राजस्थान पत्रिका)

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माजीसा राणी भटियाणी

मेहवा रा शासक रावल मल्लिाथजी री चवदमीं पीढी में रावल कल्याणमलजी जसोल रा शासक हुया। रावल कल्याणमलजी, रावल जैतमलजी रा पाटवी पुत्र हा जिका आपरै पिता रै बैद जसोल री गादी माथै विराजिया। कल्याणमल रै जोपुर रा महाराजा अभयसिंह अर बखतसिंह रै अणबल रौ वैवार रैयौ। महाराजा अभयसिंह कल्याणमल नै दबावण सारू घणा तपिया। महाराजा अभयसिंह नै वि.सं. 1787 (ई.स. 1730) में बादस्या गुजरात रै नवाब सरबुलंदखां नै दबावण वास्तै गुजरात भेजिया तद महाराजा मारवाड़ रा सैंग सामंतां, उमरावां नै इण जुद्ध में लड़ण वास्तै बुलाया। इण मौकै माथै रावल कल्याणल ई हाजर हुया अर आपरी फौज लेय'र महाराजा रै सातै गुजरात जुद्ध मांय गया। जुद्ध में जबरा लड़िया अर सेवट महाराजा री फतै हुई।
भटियाणी माता अर माजीसा रै रूप में सुचावी भटियाणी राणी स्वरूपदे जसोल रै रावल कल्याणमल (रावल कल्याणसिंह राठौड़) री पत्नी ही अर जैसलमेर रै भाटी राजपूत जोगीदास री पुत्री ही। रावल कल्याणमल राव मल्लिनाथ रा वंशज हा अर दूधावत महेचा हा। वै वीर अर ज्ञानी हा। उणां रा दो ब्याव हुया हा- अेक तौ भटियाणी स्वरूपदे सूं, जिकी जोगीदास पृथ्वीराजोत री पुत्री ही, अर दूजौ देवड़ी अमोलकदे सूं, जिकी दलेलसिंह जगसिंघोत री पुत्री ही। भटिय.ाणी स्वरूपकंवर मानता प्राप्त राणी ही। वां अणूंती ई सुंदर तौ ही ई, साथै ई बौत सहनसील ई ही। दूजी राणी देवड़ी अमोलकदे नै ऊणसूं घणी ईरसा हा। सो अेक दिन वा स्वरूपकंवर नै ज्हैर देय'र आपरी ईरसा री आग शांत करी।
वां ई दिनां जैसलमेर रा दो ढोली शंकर अर ताजिया अचाणचक रावल कल्याणमल रै दरबार मांय मांगण सारू गया तौ जैसलमेर रा रैवासी जाण'र उणां नै कैईजियौ के थांरी बाईसा तौ अबै मसाणां में विराजै, सो उठै जाय'र सीख लीजौ। वा मूंडै मांगी सीख देय देवैला। शंकर अर ताजिया राणी स्वरूपदे री चिता-स्थली माथै पूगिया अर हियै तणा उद्गार प्रगट करता थकां मांगणी सारू वीणती सरू करी। सुरगवासी राणी तद प्रगट हुय'र उणां री मांगणी पूरी करी। इण चमत्कारा री खबर देखतां-देखतां च्यारूंमेर फैलगी। तद राव कल्याणमल रा परिजन मसाण मांय जाय'र छिमा-जाचना करी अर पछै, उणरी पूजा-अरचणा सरू करी।
तद सूं ई भटियाणी राणी स्वरूपकंवर रै चमत्कारां रौ औ सिलसिलौ चालतौ आय रैयौ है अर आज पण ई चाल रैयौ है। श्रद्धालु भगत इणां री चरण-पादुका अर प्रतिमा रै दरसणां सारू जसोल पूगै अर इणां रै मिंदर मांय जाय'र भेंट स्वरूप प्रसाद ई चढावै। जसोल मांय उणां रै थान री जगै मिंदर बणियोड़ौ है। भाटियां री पुत्री हुवण री वजै सूं 'राणी भटियाणी' रै नाम सूं औ दरसणजोग स्थान चावौ है। इण नाम रै अलावा 'लख्यो राणी', 'जैसलमेरी घणियाणी', 'कंवराणी साहबा' इत्याद नामां सूं ई इणां नै श्रद्धा साथै पुकारियौ जावै। मरियां रै पैला इणां रै मूंडै सूं औ निकलियौ हौ- "म्हैं तो पुजीजूंला अर थै थांरी भुगतौला!" सौ सती रै सत-वचनां नै आज ई लोग बडी सरधा अर भगति रै रूप मांय लोकगीतां अर भजनां में गावै-
"भटियाणी, थारौ परचौ साचौ रै !"

कोई तीन सौ बरस पुराणौ जसोल ठाकर कानी सूं बणवायोड़ौ भटियाणी माता रौ स्थान आज पण धारमिक दीठ सूं गलां रौ ई श्र्‌धा रौ ई श्रद्धा रौ केन्द्र बणियोड़ौ है। उठै आयै बरस भादवै अर वेसाख महीनै री सुदी तेरस-चवदस नै विसाल पैमानै माथै मेला लागै। आं मेलां मांय नीं सिरफ राजस्थान रा इज, बल्कै गुजारात, महाराष्ट्र्, उत्तरप्रदेश, मद्रास, दिल्ली इत्याद प्रदेशां सूं हजारूं लोग दरसणां सारू जसोल पूगै। अै मेला दो दिन तांी चालतौ रैवै। बीमारियां सूं परेस्यान, औलाद सारू उत्सुक अर वौपार-नौकरी में जस हासिल करण वालां री लांबी कतारां माजीसा रै मिंदर मांय लागियोड़ी रैवै। श्रद्धा अर आस्था राखण वाला लोग माजीसा रै चमत्कारां सूं आपरौ जीवण सुखी बणावता आया है। माजीसा रै मिंदर सगलै ई अेक हुय'र आवै अर सीस नवाय'र आपरी मांगणी मांग'र, खुस हुय'र बावड़ जावै। मिंदर रै प्रांगण मांय जातरूवां रै विसराम सारु माजीसा रा भगत जन आपरी इंछा सूं दान देवण में आगीवाण रैवै। मेलै रै दिनां मांय राणी भाटियाणी रै लोकगीतां-भजन कीरतनां अर वाणियां री गूंज लागियोड़ी रैवै।
भटियाणी राणी रै चमत्कारां सूं प्रभावित हुय'र ई राजस्थान रै बाड़मेर जिलै री विकासशील पंचायत समिति, बालौतरा इणई धारमिक स्थल रै छेत्र मांय राणी भटियाणी री याद में 'राणी भटियाणीजी विराट पशु-मेला' रौ आयोजन करती रैयी है। इण पशु-मेला मायं हजारूं री संख्या में उत्तम नस्ल रा थारपारकर अर कांकरेज रा बलद, मालाणी रा घोड़ा, गायां, भैस्यां, बकरा-बकरियां, ऊंट-सांडियां, टोडिया, खच्चर, भेडां इत्याद अेकठ हुवै। मेलै मांय पशुवां री खरीद बिक्री सारू समुचति व्यवस्था करीजै। राजस्थान रै अलावा गुजरात, पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश इत्याद रा चावा वौपारी पशुवां री खरी सारू आवै।
आथूणै राजस्थान मांय राणी भटियाणी री मानता हदभांत ई देखण में आवै। केई नगरां अर गांमां मांय राणी भटियाणी रा स्थान है, जठै लोग श्रद्धा-आस्था सूं आवै अर कस्टां सूं छुटकारौ पावै। मुख्य थान तौ मिंदर रै रूप में जसोल मांय है इज।

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